📋 संक्षिप्त सारांश
विष्णु सहस्रनामावली - मुख्य बिंदु:
- क्या है: भगवान विष्णु के 1000 नामों का सरलीकृत संस्करण (संस्कृत श्लोकों का सरल रूप)
- किसके लिए: जो संस्कृत के जटिल श्लोक नहीं पढ़ सकते - सामान्य भक्तों के लिए विशेष
- कब करें: एकादशी, बृहस्पतिवार, प्रातःकाल, या कभी भी सुविधानुसार
- मुख्य लाभ: मानसिक शांति, मोक्ष प्राप्ति, बृहस्पति और अन्य ग्रह दोष निवारण, सुख-समृद्धि
- विशेषता: स्तोत्र पाठ के समान ही पुण्यफल, बिना कठिन उच्चारण के
- आवश्यक: केवल श्रद्धा, विश्वास और समर्पण भाव
- समय: लगभग 15-20 मिनट में पूर्ण पाठ
श्री विष्णु सहस्रनामावली - यह वह दिव्य संकलन है जो भगवान विष्णु के एक हजार पवित्र नामों को अत्यंत सरल और सुबोध रूप में प्रस्तुत करता है। महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र के जटिल संस्कृत श्लोकों का उच्चारण हर किसी के लिए सहज नहीं होता। इसी कारण से यह नामावली उन समस्त भक्तों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है जो संस्कृत के विद्वान न होते हुए भी भगवान श्रीहरि विष्णु के नाम-स्मरण से उत्पन्न होने वाले अपार पुण्य और आशीर्वाद को प्राप्त करना चाहते हैं। चाहे आप छात्र हों, गृहस्थ हों, या व्यस्त जीवनशैली में जीने वाले कोई भी व्यक्ति - यह सरलीकृत नामावली आपके लिए भक्ति का सहज मार्ग है।
परिचय - विष्णु सहस्रनामावली क्या है?
विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र हिन्दू धर्म का एक अत्यन्त पूजनीय ग्रंथ है, जिसमें भगवान विष्णु के सहस्र नामों का वर्णन किया गया है। इन नामों का जप करने से मनुष्य को शान्ति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। परन्तु संस्कृत के जटिल श्लोकों का उच्चारण सभी के लिए सरल नहीं होता। कई भक्त चाहते हुए भी उच्चारण की कठिनाई के कारण इस पवित्र स्तोत्र का पाठ नहीं कर पाते। इसी समस्या के समाधान के लिए इस विष्णु सहस्रनामावली का संकलन किया गया है, जो प्रत्येक भक्त को भगवान के दरबार में पहुंचने का सरल मार्ग प्रदान करती है।
सरल रूप में नामावली - सभी के लिए सुगम
इस नामावली में भगवान विष्णु के सहस्र नामों को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक नाम को अलग-अलग पढ़ा और जपा जा सकता है। इससे साधक बिना कठिनाई के भगवान के नामों का स्मरण कर सकते हैं और भक्ति का अनुभव कर सकते हैं। जैसे - विश्वम्, विष्णुः, वषट्कारः, भूतभव्यभवत्प्रभुः आदि प्रत्येक नाम का स्वतंत्र रूप से जाप किया जा सकता है।
यह नामावली मूल विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का ही सरलीकृत रूप है। इसमें वही 1000 दिव्य नाम हैं जो महाभारत के अनुशासन पर्व में पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को बताए थे। अंतर केवल इतना है कि श्लोक रूप के स्थान पर नाम अलग-अलग सूचीबद्ध हैं।
उद्देश्य - सर्वजन सुलभ भक्ति
इस संकलन का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति—चाहे वह संस्कृत का विद्वान हो या सामान्य भक्त—भगवान विष्णु के नामों का जप कर सके। नामावली का पाठ करने से वही पुण्यफल प्राप्त होता है जो सहस्रनाम स्तोत्र के जप से मिलता है। भगवान विष्णु आपकी भावना को देखते हैं, आपके उच्चारण की शुद्धता को नहीं। यदि हृदय में सच्ची श्रद्धा और समर्पण है, तो भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं।
लाभ - जीवन में शांति और संतोष
नित्य विष्णु सहस्रनामावली का पाठ करने से मन में शुद्धता आती है, जीवन में शान्ति और संतोष का संचार होता है। यह साधना भक्त को ईश्वर के प्रति समर्पण और आस्था की ओर ले जाती है। प्रतिदिन कुछ समय निकालकर भगवान के नामों का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होता है और मन को अद्भुत शांति की अनुभूति होती है।
विष्णु सहस्रनामावली पाठ की संपूर्ण विधि
पाठ से पूर्व की तैयारी
सबसे पहले तो आप स्नान आदि कर के शुद्ध हो जाएं। यदि आप किसी कारण वश स्नान आदि नहीं कर सकते तो हृदय से भगवान विष्णु जिनके नयन कमल के समान हैं उनका ध्यान कीजिए! और यह भावना रखिए के उनकी दृष्टि आपके ऊपर पड़ रही है और आपको तन - मन - और अन्य सभी नकारात्मक परिस्थिति से शुद्ध कर रही है।
महत्वपूर्ण!
पाठ के समय किसी अन्य कार्य में व्यस्त न हों और पूर्ण एकाग्रता बनाए रखें। याद रखें - भगवान को आपके भाव की आवश्यकता है, भौतिक सामग्री की नहीं।
संकल्प विधि - मन को स्थिर करना
उसके बाद दाहिने हाथ में यदि 2 बूंद जल लेना संभव हो तो लेकर यह संकल्प कीजिए, जो ठीक निचे दिया हुआ है:
"मेरा नाम ..... है, मेरे पिता का नाम .... तथा माता का नाम .... है, मैं भगवान विष्णु की शरण में हो कर उनकी कृपा प्राप्ति के लिए, मानसिक शांति प्राप्ति के लिए, इस जीवन में यश और वैभव प्राप्ति के लिए, उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य के लिए तथा सौभाग्य प्राप्ति के लिए अपनी समझ और विवेक अनुसार श्री विष्णु सहस्र नामावली का .....बार पाठ करने का संकल्प करता/करती हूं।"
"मेरा नाम काव्य है, मेरे पिता का नाम विश्वास है और मेरी माता का नाम सौम्या है, मैं भगवान विष्णु की शरण में हो कर उनकी कृपा प्राप्ति के लिए, मानसिक शांति प्राप्ति के लिए, इस जीवन में यश और वैभव प्राप्ति के लिए, उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य के लिए तथा सौभाग्य प्राप्ति के लिए अपनी समझ, ज्ञान और विवेक अनुसार श्री विष्णु सहस्र नामावली का 1 बार पाठ करने का संकल्प करता/करती हूं।"
ध्यान और भावना - मन को एकाग्र करना
ऐसा कहकर जल को गिरा दें जो आपने हाथ में लिया था। अब इसके बाद आंख मूंदकर भगवान विष्णु का ध्यान कीजिए, या अपने सामने कोई चित्र आदि रखकर उन्हें देखते रहिए। उनके दाहिने हाथ में चक्र और गदा, बाएं हाथ में शंख और कमल पुष्प, इत्यादि जितनी भी बारीक चीजें आप सोच सकें, आप सोचते रहें, और मन में भाव रखें के सबकुछ भगवान विष्णु ही हैं, आज का दिन भी भगवान विष्णु हैं, समस्त ग्रह और नक्षत्र भगवान विष्णु हैं, आज की तिथि भगवान विष्णु हैं और सबकुछ भगवान विष्णु ही हैं!
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
श्वेत वस्त्रधारी, चंद्र के समान कांतिमान, चतुर्भुज, प्रसन्न मुखमंडल वाले भगवान विष्णु का ध्यान करें।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
प्रारंभिक मंत्र - गुरु और देवताओं का स्मरण
2 से 3 मिनट तक ऐसा करने के बाद, अब निम्न मंत्र पढ़िए:
मातृपितृ चरण कमलेभ्यो नमः। श्री गुरुभ्यो नमः। श्री परम गुरुभ्यो नमः। वंदे कृष्णऺ जगद्गुरूम। श्री दत्तात्रेय नमः । श्रीमन्महा गणाधिपतये नमः। लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः। उमामहेश्वराभ्यां नमः। इष्टदेवताभ्यो नमः। कुलदेवताभ्यो नमः। सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः। सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नमः।
मुख्य नामावली पाठ - सरल और सुबोध
पाठ करने का तरीका:
'हरि: ओम' से प्रारम्भ कर के 'श्री सर्वप्रहरणायुधाय नमः' तक सभी 1000 नामों का पाठ करें। प्रत्येक नाम के बाद 'नमः' बोलें। यदि संभव न हो तो केवल नाम भी पढ़ सकते हैं। धीरे-धीरे, स्पष्ट उच्चारण के साथ, मन को एकाग्र रखते हुए पढ़ें। जल्दबाजी न करें।
यदि आप पहली बार पाठ कर रहे हैं तो घबराएं नहीं। भले ही उच्चारण में कुछ गलतियां हों, भगवान आपकी भावना को देखते हैं। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे आप सिद्धहस्त हो जाएंगे। महत्वपूर्ण है - नियमितता और श्रद्धा।
हरि: ओम
श्री विश्वस्मै नमः । श्री विष्णवे नमः । श्री वषट्काराय नमः । श्री भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः । श्री भूतकृते नमः । श्री भूतभृते नमः । श्री भावाय नमः । श्री भूतात्मने नमः । श्री भूतभावनाय नमः । श्री पूतात्मने नमः । १० ॥ श्री परमात्मने नमः । श्री मुक्तानाम्परमगतये नमः । श्री अव्ययाय नमः । श्री पुरुषाय नमः । श्री साक्षिणे नमः । श्री क्षेत्रज्ञाय नमः । श्री अक्षराय नमः । श्री योगाय नमः । श्री योगविदांनेत्रे नमः । श्री प्रधानपुरुषेश्वराय नमः । २० ॥ श्री नारसिंहवपुषे नमः । श्री श्रीमते नमः । श्री केशवाय नमः । श्री पुरुषोत्तमाय नमः । श्री सर्वस्मै नमः । श्री शर्वाय नमः । श्री शिवाय नमः । श्री स्थाणवे नमः । श्री भूतादये नमः । श्री निधयेऽव्ययाय नमः । ३० ॥ श्री सम्भवाय नमः । श्री भावनाय नमः । श्री भर्त्रे नमः । श्री प्रभवाय नमः । श्री प्रभवे नमः । श्री ईश्वराय नमः । श्री स्वयम्भुवे नमः । श्री शम्भवे नमः । श्री आदित्याय नमः । श्री पुष्कराक्षाय नमः । ४० ॥ श्री महास्वनाय नमः । श्री अनादिनिधनाय नमः । श्री धात्रे नमः । श्री विधात्रे नमः । श्री धातुरुत्तमाय नमः । श्री अप्रमेयाय नमः । श्री हृषीकेशाय नमः । श्री पद्मनाभाय नमः । श्री अमरप्रभवे नमः । श्री विश्वकर्मणे नमः । ५० ॥
श्री मनवे नमः । श्री त्वष्ट्रे नमः । श्री स्थविष्ठाय नमः । श्री स्थविराय ध्रुवाय नमः । श्री अग्रह्याय नमः । श्री शाश्वताय नमः । श्री कृष्णाय नमः । श्री लोहिताक्षाय नमः । श्री प्रतर्दनाय नमः । श्री प्रभूताय नमः । ६० ॥ श्री त्रिककुब्धाम्ने नमः । श्री पवित्राय नमः । श्री मङ्गलाय परस्मै नमः । श्री ईशानाय नमः । श्री प्राणदाय नमः । श्री प्राणाय नमः । श्री ज्येष्ठाय नमः । श्री श्रेष्ठाय नमः । श्री प्रजापतये नमः । श्री हिरण्यगर्भाय नमः । ७० ॥ श्री भूगर्भाय नमः । श्री माधवाय नमः । श्री मधुसूदनाय नमः । श्री ईश्वराय नमः । श्री विक्रमिणे नमः । श्री धन्विने नमः । श्री मेधाविने नमः । श्री विक्रमाय नमः । श्री क्रमाय नमः । श्री अनुत्तमाय नमः । ८० ॥ श्री दुराधर्षाय नमः । श्री कृतज्ञाय नमः । श्री कृतये नमः । श्री आत्मवते नमः । श्री सुरेशाय नमः । श्री शरणाय नमः । श्री शर्मणे नमः । श्री विश्वरेतसे नमः । श्री प्रजाभवाय नमः । श्री अन्हे नमः । ९० ॥ श्री संवत्सराय नमः । श्री व्यालाय नमः । श्री प्रत्ययाय नमः । श्री सर्वदर्शनाय नमः । श्री अजाय नमः । श्री सर्वेश्वराय नमः । श्री सिद्धाय नमः । श्री सिद्धये नमः । श्री सर्वादये नमः । श्री अच्युताय नमः । १०० ॥
श्री वृषाकपये नमः । श्री अमेयात्मने नमः । श्री सर्वयोगविनिःसृताय नमः । श्री वसवे नमः । श्री वसुमनसे नमः । श्री सत्याय नमः । श्री समात्मने नमः । श्री सम्मिताय नमः । श्री समाय नमः । श्री अमोघाय नमः । ११० ॥ श्री पुण्डरीकाक्षाय नमः । श्री वृषकर्मणे नमः । श्री वृषाकृतये नमः । श्री रुद्राय नमः । श्री बहुशिरसे नमः । श्री बभ्रवे नमः । श्री विश्वयोनये नमः । श्री शुचिश्रवसे नमः । श्री अमृताय नमः । श्री शाश्वतस्थाणवे नमः । १२० ॥ श्री वरारोहाय नमः । श्री महातपसे नमः । श्री सर्वगाय नमः । श्री सर्वविद्भानवे नमः । श्री विष्वक्सेनाय नमः । श्री जनार्दनाय नमः । श्री वेदाय नमः । श्री वेदविदे नमः । श्री अव्यङ्गाय नमः । श्री वेदाङ्गाय नमः । १३० ॥ श्री वेदविदे नमः । श्री कवये नमः । श्री लोकाध्यक्षाय नमः । श्री सुराध्यक्षाय नमः । श्री धर्माध्यक्षाय नमः । श्री कृताकृताय नमः । श्री चतुरात्मने नमः । श्री चतुर्व्यूहाय नमः । श्री चतुर्द्रम्ष्ट्राय नमः । श्री चतुर्भुजाय नमः । १४० ॥ श्री भ्राजिष्णवे नमः । श्री भोजनाय नमः । श्री भोक्त्रे नमः । श्री सहिष्णवे नमः । श्री जगदादिजाय नमः । श्री अनघाय नमः । श्री विजयाय नमः । श्री जेत्रे नमः । १५० ॥
श्री विश्वयोनये नमः । श्री पुनर्वसवे नमः । श्री उपेन्द्राय नमः । श्री वामनाय नमः । श्री प्रांशवे नमः । श्री अमोघाय नमः । श्री शुचये नमः । श्री उर्जिताय नमः । श्री अतीन्द्राय नमः । श्री सङ्ग्रहाय नमः । श्री सर्गाय नमः । श्री धृतात्मने नमः । १६० ॥ श्री नियमाय नमः । श्री यमाय नमः । श्री वेद्याय नमः । श्री वैद्याय नमः । श्री सदायोगिने नमः । श्री वीरघ्ने नमः । श्री माधवाय नमः । श्री मधवे नमः । श्री अतीन्द्रियाय नमः । श्री महामायाय नमः । श्री महोत्साहाय नमः । श्री महाबलाय नमः । श्री महाबुद्धये नमः । श्री महावीर्याय नमः । श्री महाशक्तये नमः । श्री महाद्युतये नमः । श्री अनिर्देश्यवपुषे नमः । श्री श्रीमते नमः । श्री अमेयात्मने नमः । श्री महाद्रिधृते नमः । १८० ॥ श्री महेश्वासाय नमः । श्री महीभर्त्रे नमः । श्री श्रीनिवासाय नमः । श्री सताङ्गतये नमः । श्री अनिरुद्धाय नमः । श्री सुरानन्दाय नमः । श्री गोविन्दाय नमः । श्री गोविदाम्पतये नमः । श्री मरीचये नमः । श्री दमनाय नमः । श्री हंसाय नमः । श्री सुपर्णाय नमः । श्री भुजगोत्तमाय नमः । श्री हिरण्यनाभाय नमः । श्री सुतपसे नमः । श्री पद्मनाभाय नमः । श्री प्रजापतये नमः । श्री अमृत्यवे नमः । श्री सर्वदृशे नमः । श्री सिंहाय नमः । २०० ॥
श्री सन्धात्रे नमः । श्री सन्धिमते नमः । श्री स्थिराय नमः । श्री अजाय नमः । श्री दुर्मर्षणाय नमः । श्री शास्त्रे नमः । श्री विश्रुतात्मने नमः । श्री सुरारिघ्ने नमः । श्री गुरुवे नमः । श्री गुरुतमाय नमः । श्री धाम्ने नमः । श्री सत्याय नमः । श्री सत्यपराक्रमाय नमः । श्री निमिषाय नमः । श्री अनिमिषाय नमः । श्री स्रग्वीणे नमः । श्री वाचस्पतये उदारधिये नमः । श्री अग्रण्ये नमः । श्री ग्रामण्ये नमः । श्री श्रीमते नमः । २२० ॥ श्री न्यायाय नमः । श्री नेत्रे नमः । श्री समीरणाय नमः । श्री सहस्रमूर्ध्ने नमः । श्री विश्वात्मने नमः । श्री सहस्राक्षाय नमः । श्री सहस्रपदे नमः । श्री आवर्तनाय नमः । श्री निवृत्तात्मने नमः । श्री संवृताय नमः । श्री सम्प्रमर्दनाय नमः । श्री अहःसंवर्तकाय नमः । श्री वह्नये नमः । श्री अनिलाय नमः । श्री धरणीधराय नमः । श्री सुप्रसादाय नमः । श्री प्रसन्नात्मने नमः । श्री विश्वधृषे नमः । श्री विश्वभुजे नमः । श्री विभवे नमः । २४० ॥ श्री सत्कर्त्रे नमः । श्री सत्कृताय नमः । श्री साधवे नमः । श्री जह्नवे नमः । श्री नारायणाय नमः । श्री नराय नमः । श्री असङ्ख्येयाय नमः । श्री अप्रमेयात्मने नमः । श्री विशिष्टाय नमः । श्री शिष्टकृते नमः ।
श्री शुचये नमः । श्री सिद्धार्थाय नमः । श्री सिद्धसङ्कल्पाय नमः । श्री सिद्धिदाय नमः । श्री सिद्धिसाधनाय नमः । श्री वृषाहिणे नमः । श्री वृषभाय नमः । श्री विष्णवे नमः । श्री वृषपर्वणे नमः । श्री वृषोदराय नमः । २६० ॥ श्री वर्धनाय नमः । श्री वर्धमानाय नमः । श्री विविक्ताय नमः । श्री श्रुतिसागराय नमः । श्री सुभुजाय नमः । श्री दुर्धराय नमः । श्री वाग्मिने नमः । श्री महेन्द्राय नमः । श्री वसुदाय नमः । श्री वसवे नमः । २७० ॥ श्री नैकरूपाय नमः । श्री बृहद्रूपाय नमः । श्री शिपिविष्टाय नमः । श्री प्रकाशनाय नमः । श्री ओजस्तेजोद्युतिधराय नमः । श्री प्रकाशात्मने नमः । श्री प्रतापनाय नमः । श्री ऋद्धाय नमः । श्री स्पष्टाक्षराय नमः । श्री मन्त्राय नमः । २८० ॥ श्री चन्द्रांशवे नमः । श्री भास्करद्युतये नमः । श्री अमृतांशूद्भवाय नमः । श्री भानवे नमः । श्री शशिबिन्दवे नमः । श्री सुरेश्वराय नमः । श्री औषधाय नमः । श्री जगतस्सेतवे नमः । श्री सत्यधर्मपराक्रमाय नमः । श्री भूतभव्यभवन्नाथाय नमः । २९० ॥ श्री पवनाय नमः । श्री पावनाय नमः । श्री अनलाय नमः । श्री कामघ्ने नमः । श्री कामकृते नमः । श्री कान्ताय नमः । श्री कामाय नमः । श्री कामप्रदाय नमः । श्री प्रभवे नमः । श्री युगादिकृते नमः । ३०० ॥
श्री युगावर्ताय नमः । श्री नैकमायाय नमः । श्री महाशनाय नमः । श्री अदृश्याय नमः । श्री व्यक्तरूपाय नमः । श्री सहस्रजिते नमः । श्री अनन्तजिते नमः । श्री इष्टाय नमः । श्री विशिष्टाय नमः । श्री शिष्टेष्टाय नमः । ३१० ॥ श्री शिखण्डिने नमः । श्री नहुषाय नमः । श्री वृषाय नमः । श्री क्रोधग्ने नमः । श्री क्रोधकृत्कर्त्रे नमः । श्री विश्वबाहवे नमः । श्री महीधराय नमः । श्री अच्युताय नमः । श्री प्रथिताय नमः । श्री प्राणाय नमः । ३२० ॥ श्री प्राणदाय नमः । श्री वासवानुजाय नमः । श्री अपांनिधये नमः । श्री अधिष्ठानाय नमः । श्री अप्रमत्ताय नमः । श्री प्रतिष्ठिताय नमः । श्री स्कन्दाय नमः । श्री स्कन्दधराय नमः । श्री धुर्याय नमः । श्री वरदाय नमः । श्री वायुवाहनाय नमः । श्री वासुदेवाय नमः । श्री बृहद्भानवे नमः । श्री आदिदेवाय नमः । श्री पुरन्दराय नमः । श्री अशोकाय नमः । श्री तारणाय नमः । श्री ताराय नमः । श्री शूराय नमः । श्री शौरये नमः । ३४० ॥ श्री जनेश्वराय नमः । श्री अनुकूलाय नमः । श्री शतावर्ताय नमः । श्री पद्मिने नमः । श्री पद्मनिभेक्षणाय नमः । श्री पद्मनाभाय नमः । श्री अरविन्दाक्षाय नमः । श्री पद्मगर्भाय नमः । श्री शरीरभृते नमः । श्री महर्धये नमः । ३५० ॥
श्री ऋद्धाय नमः । श्री वृद्धात्मने नमः । श्री महाक्षाय नमः । श्री गरुडध्वजाय नमः । श्री अतुलाय नमः । श्री शरभाय नमः । श्री भीमाय नमः । श्री समयज्ञाय नमः । श्री हविर्हरये नमः । श्री सर्वलक्षणलक्षण्याय नमः । श्री लक्ष्मीवते नमः । श्री समितिञ्जयाय नमः । श्री विक्षराय नमः । श्री रोहिताय नमः । श्री मार्गाय नमः । श्री हेतवे नमः । श्री दामोदराय नमः । श्री सहाय नमः । श्री महीधराय नमः । श्री महाभागाय नमः । ३७० ॥ श्री वेगवते नमः । श्री अमिताशनाय नमः । श्री उद्भवाय नमः । श्री क्षोभणाय नमः । श्री देवाय नमः । श्री श्रीगर्भाय नमः । श्री परमेश्वराय नमः । श्री करणाय नमः । श्री कारणाय नमः । श्री कर्त्रे नमः । ३८० ॥ श्री विकर्त्रे नमः । श्री गहनाय नमः । श्री गुहाय नमः । श्री व्यवसायाय नमः । श्री व्यवस्थानाय नमः । श्री संस्थानाय नमः । श्री स्थानदाय नमः । श्री ध्रुवाय नमः । श्री परर्धये नमः । श्री परमस्पष्टाय नमः । श्री तुष्टाय नमः । श्री पुष्टाय नमः । श्री शुभेक्षणाय नमः । श्री रामाय नमः । श्री विरामाय नमः । श्री विरजाय नमः । श्री मार्गाय नमः । श्री नेयाय नमः । श्री नयाय नमः । श्री अनयाय नमः । ४०० ॥
श्री वीराय नमः । श्री शक्तिमतां श्रेष्ठाय नमः । श्री धर्माय नमः । श्री धर्मविदुत्तमाय नमः । श्री वैकुण्ठाय नमः । श्री पुरुषाय नमः । श्री प्राणाय नमः । श्री प्राणदाय नमः । श्री प्रणवाय नमः । श्री पृथवे नमः । श्री हिरण्यगर्भाय नमः । श्री शत्रुघ्नाय नमः । श्री व्याप्ताय नमः । श्री वायवे नमः । श्री अधोक्षजाय नमः । श्री ऋतवे नमः । श्री सुदर्शनाय नमः । श्री कालाय नमः । श्री परमेष्ठिने नमः । श्री परिग्रहाय नमः । ४२० ॥ श्री उग्राय नमः । श्री संवत्सराय नमः । श्री दक्षाय नमः । श्री विश्रामाय नमः । श्री विश्वदक्षिणाय नमः । श्री विस्ताराय नमः । श्री स्थावरस्थाणवे नमः । श्री प्रमाणाय नमः । श्री बीजाय अव्ययाय नमः । श्री अर्थाय नमः । ४३० ॥ श्री अनर्थाय नमः । श्री महाकोशाय नमः । श्री महाभोगाय नमः । श्री महाधनाय नमः । श्री अनिर्विण्णाय नमः । श्री स्थविष्ठाय नमः । श्री भुवे नमः । श्री धर्मयूपाय नमः । श्री महामखाय नमः । श्री नक्षत्रनेमये नमः । ४४० ॥ श्री नक्षित्रिणे नमः । श्री क्षमाय नमः । श्री क्षामाय नमः । श्री समीहनाय नमः । श्री यज्ञाय नमः । श्री इज्याय नमः । श्री महेज्याय नमः । श्री क्रतवे नमः । श्री सत्राय नमः । श्री सताङ्गतये नमः । ४५० ॥
श्री सर्वदर्शिने नमः । श्री विमुक्तात्मने नमः । श्री सर्वज्ञाय नमः । श्री ज्ञानमुत्तमाय नमः । श्री सुव्रताय नमः । श्री सुमुखाय नमः । श्री सूक्ष्माय नमः । श्री सुघोषाय नमः । श्री सुखदाय नमः । श्री सुहृदे नमः । ४६० ॥ श्री मनोहराय नमः । श्री जितक्रोधाय नमः । श्री वीरबाहवे नमः । श्री विदारणाय नमः । श्री स्वापनाय नमः । श्री स्ववशाय नमः । श्री व्यापिने नमः । श्री नैकात्मने नमः । श्री नैककर्मकृते नमः । श्री वत्सराय नमः । ४७० ॥ श्री वत्सलाय नमः । श्री वत्सिने नमः । श्री रत्नगर्भाय नमः । श्री धनेश्वराय नमः । श्री धर्मगुप्ते नमः । श्री धर्मकृते नमः । श्री धर्मिणे नमः । श्री सते नमः । श्री असते नमः । श्री क्षराय नमः । ४८० ॥ श्री अक्षराय नमः । श्री अविज्ञात्रे नमः । श्री सहस्रांशवे नमः । श्री विधात्रे नमः । श्री कृतलक्षणाय नमः । श्री गभस्तिनेमये नमः । श्री सत्त्वस्थाय नमः । श्री सिंहाय नमः । श्री भूतमहेश्वराय नमः । श्री आदिदेवाय नमः । ४९० ॥ श्री महादेवाय नमः । श्री देवेशाय नमः । श्री देवभृद्गुरवे नमः । श्री उत्तराय नमः । श्री गोपतये नमः । श्री गोप्त्रे नमः । श्री ज्ञानगम्याय नमः । श्री पुरातनाय नमः । श्री शरीरभूतभृते नमः । श्री भोक्त्रे नमः । ५०० ॥
श्री कपीन्द्राय नमः । श्री भूरिदक्षिणाय नमः । श्री सोमपाय नमः । श्री अमृतपाय नमः । श्री सोमाय नमः । श्री पुरुजिते नमः । श्री पुरुसत्तमाय नमः । श्री विनयाय नमः । श्री जयाय नमः । श्री सत्यसन्धाय नमः । ५१० ॥ श्री दाशार्हाय नमः । श्री सात्वतां पतये नमः । श्री जीवाय नमः । श्री विनयितासाक्षिणे नमः । श्री मुकुन्दाय नमः । श्री अमितविक्रमाय नमः । श्री अम्भोनिधये नमः । श्री अनन्तात्मने नमः । श्री महोदधिशयाय नमः । श्री अन्तकाय नमः । ५२० ॥ श्री अजाय नमः । श्री महार्हाय नमः । श्री स्वाभाव्याय नमः । श्री जितामित्राय नमः । श्री प्रमोदनाय नमः । श्री आनन्दाय नमः । श्री नन्दनाय नमः । श्री नन्दाय नमः । श्री सत्यधर्मणे नमः । श्री त्रिविक्रमाय नमः । ५३० ॥ श्री महर्षये कपिलाचार्याय नमः । श्री कृतज्ञाय नमः । श्री मेदिनीपतये नमः । श्री त्रिपदाय नमः । श्री त्रिदशाध्यक्षाय नमः । श्री महाशृङ्गाय नमः । श्री कृतान्तकृते नमः । श्री महावराहाय नमः । श्री गोविन्दाय नमः । श्री सुषेणाय नमः । ५४० ॥ श्री कनकाङ्गदिने नमः । श्री गुह्याय नमः । श्री गभीराय नमः । श्री गहनाय नमः । श्री गुप्ताय नमः । श्री चक्रगदाधराय नमः । श्री वेधसे नमः । श्री स्वाङ्गाय नमः । श्री अजिताय नमः । श्री कृष्णाय नमः । ५५० ॥
श्री दृढाय नमः । श्री सङ्कर्षणाय अच्युताय नमः । श्री वरुणाय नमः । श्री वारुणाय नमः । श्री वृक्षाय नमः । श्री पुष्कराक्षाय नमः । श्री महामनसे नमः । श्री भगवते नमः । श्री भगघ्ने नमः । श्री आनन्दिने नमः । ५६० ॥ श्री वनमालिने नमः । श्री हलायुधाय नमः । श्री आदित्याय नमः । श्री ज्योतिरादित्याय नमः । श्री सहिष्णुवे नमः । श्री गतिसत्तमाय नमः । श्री सुधन्वने नमः । श्री खण्डपरशवे नमः । श्री दारुणाय नमः । श्री द्रविणप्रदाय नमः । ५७० ॥ श्री दिवस्पृशे नमः । श्री सर्वदृग्व्यासाय नमः । श्री वाचस्पतये अयोनिजाय नमः । श्री त्रिसाम्ने नमः । श्री सामगाय नमः । श्री साम्ने नमः । श्री निर्वाणाय नमः । श्री भेषजाय नमः । श्री भिषजे नमः । श्री सन्न्यासकृते नमः । ५८० ॥ श्री शमाय नमः । श्री शान्ताय नमः । श्री निष्ठायै नमः । श्री शान्त्यै नमः । श्री परायणाय नमः । श्री शुभाङ्गाय नमः । श्री शान्तिदाय नमः । श्री स्रष्टाय नमः । श्री कुमुदाय नमः । श्री कुवलेशयाय नमः । ५९० ॥ श्री गोहिताय नमः । श्री गोपतये नमः । श्री गोप्त्रे नमः । श्री वृषभाक्षाय नमः । श्री वृषप्रियाय नमः । श्री अनिवर्तिने नमः । श्री निवृत्तात्मने नमः । श्री सङ्क्षेप्त्रे नमः । श्री क्षेमकृते नमः । श्री शिवाय नमः । ६०० ॥
श्री श्रीवत्सवक्षसे नमः । श्री श्रीवासाय नमः । श्री श्रीपतये नमः । श्री श्रीमतां वराय नमः । श्री श्रीदाय नमः । श्री श्रीशाय नमः । श्री श्रीनिवासाय नमः । श्री श्रीनिधये नमः । श्री श्रीविभावनाय नमः । श्री श्रीधराय नमः । ६१० ॥ श्री श्रीकराय नमः । श्री श्रेयसे नमः । श्री श्रीमते नमः । श्री लोकत्रयाश्रयाय नमः । श्री स्वक्षाय नमः । श्री स्वङ्गाय नमः । श्री शतानन्दाय नमः । श्री नन्दिने नमः । श्री ज्योतिर्गणेश्वराय नमः । श्री विजितात्मने नमः । ६२० ॥ श्री विधेयात्मने नमः । श्री सत्कीर्तये नमः । श्री छिन्नसंशयाय नमः । श्री उदीर्णाय नमः । श्री सर्वतश्चक्षुषे नमः । श्री अनीशाय नमः । श्री शाश्वतस्थिराय नमः । श्री भूशयाय नमः । श्री भूषणाय नमः । श्री भूतये नमः । ६३० ॥ श्री विशोकाय नमः । श्री शोकनाशनाय नमः । श्री अर्चिष्मते नमः । श्री अर्चिताय नमः । श्री कुम्भाय नमः । श्री विशुद्धात्मने नमः । श्री विशोधनाय नमः । श्री अनिरुद्धाय नमः । श्री अप्रतिरथाय नमः । श्री प्रद्युम्नाय नमः । ६४० ॥ श्री अमितविक्रमाय नमः । श्री कालनेमिनिघ्ने नमः । श्री वीराय नमः । श्री शौरये नमः । श्री शूरजनेश्वराय नमः । श्री त्रिलोकात्मने नमः । श्री त्रिलोकेशाय नमः । श्री केशवाय नमः । श्री केशिघ्ने नमः । श्री हरये नमः । ६५० ॥
श्री कामदेवाय नमः । श्री कामपालाय नमः । श्री कामिने नमः । श्री कान्ताय नमः । श्री कृतागमाय नमः । श्री अनिर्देश्यवपुषे नमः । श्री विष्णवे नमः । श्री वीराय नमः । श्री अनन्ताय नमः । श्री धनञ्जयाय नमः । ६६० ॥ श्री ब्रह्मण्याय नमः । श्री ब्रह्मकृते नमः । श्री ब्रह्मणे नमः । श्री ब्राह्मणे नमः । श्री ब्रह्माय नमः । श्री ब्रह्मविवर्धनाय नमः । श्री ब्रह्मविदे नमः । श्री ब्राह्मणाय नमः । श्री ब्रह्मिणे नमः । श्री ब्रह्मज्ञाय नमः । ६७० ॥ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः । श्री महाक्रमाय नमः । श्री महाकर्मणे नमः । श्री महातेजसे नमः । श्री महोरगाय नमः । श्री महाक्रतवे नमः । श्री महायज्विने नमः । श्री महायज्ञाय नमः । श्री महाहविषे नमः । श्री स्तव्याय नमः । ६८० ॥ श्री स्तवप्रियाय नमः । श्री स्तोत्राय नमः । श्री स्तुतये नमः । श्री स्तोत्रे नमः । श्री रणप्रियाय नमः । श्री पूर्णाय नमः । श्री पूरयित्रे नमः । श्री पुण्याय नमः । श्री पुण्यकीर्तये नमः । श्री अनामयाय नमः । ६९० ॥ श्री मनोजवाय नमः । श्री तीर्थकराय नमः । श्री वसुरेतसे नमः । श्री वसुप्रदाय नमः । श्री वासुदेवाय नमः । श्री वसवे नमः । श्री वसुमनसे नमः । श्री हविषे नमः । श्री हविषे नमः । श्री सद्गतये नमः । ७०० ॥
श्री सत्कृतये नमः । श्री सत्तायै नमः । श्री सद्भूतये नमः । श्री सत्परायणाय नमः । श्री शूरसेनाय नमः । श्री यदुश्रेष्ठाय नमः । श्री सन्निवासाय नमः । श्री सुयामुनाय नमः । श्री भूतावासाय नमः । श्री वासुदेवाय नमः । ७१० ॥ श्री सर्वासुनिलयाय नमः । श्री अनलाय नमः । श्री दर्पघ्ने नमः । श्री दर्पदाय नमः । श्री दृप्ताय नमः । श्री दुर्धराय नमः । श्री अपराजिताय नमः । श्री विश्वमूर्तये नमः । श्री महामूर्तये नमः । श्री दीप्तमूर्तये नमः । ७२० ॥ श्री अमूर्तिमते नमः । श्री अनेकमूर्तये नमः । श्री अव्यक्ताय नमः । श्री शतमूर्तये नमः । श्री शताननाय नमः । श्री एकैस्मै नमः । श्री नैकस्मै नमः । श्री सवाय नमः । श्री काय नमः । श्री कस्मै नमः । ७३० ॥ श्री यस्मै नमः । श्री तस्मै नमः । श्री पदमनुत्तमाय नमः । श्री लोकबन्धवे नमः । श्री लोकनाथाय नमः । श्री माधवाय नमः । श्री भक्तवत्सलाय नमः । श्री सुवर्णवर्णाय नमः । श्री हेमाङ्गाय नमः । श्री वराङ्गाय नमः । ७४० ॥ श्री चन्दनाङ्गदिने नमः । श्री वीरघ्ने नमः । श्री विषमाय नमः । श्री शून्याय नमः । श्री घृताशिषे नमः । श्री अचलाय नमः । श्री चलाय नमः । श्री अमानिने नमः । श्री मानदाय नमः । श्री मान्याय नमः । ७५० ॥
श्री लोकस्वामिने नमः । श्री त्रिलोकधृषे नमः । श्री सुमेधसे नमः । श्री मेधजाय नमः । श्री धन्याय नमः । श्री सत्यमेधसे नमः । श्री धराधराय नमः । श्री तेजोवृषाय नमः । श्री द्युतिधराय नमः । श्री सर्वशस्त्रभृतांवराय नमः । ७६० ॥ श्री प्रग्रहाय नमः । श्री निग्रहाय नमः । श्री व्यग्राय नमः । श्री नैकशृङ्गाय नमः । श्री गदाग्रजाय नमः । श्री चतुर्मूर्तये नमः । श्री चतुर्बाहवे नमः । श्री चतुर्व्यूहाय नमः । श्री चतुर्गतये नमः । श्री चतुरात्मने नमः । ७७० ॥ श्री चतुर्भावाय नमः । श्री चतुर्वेदविदे नमः । श्री एकपदे नमः । श्री समावर्ताय नमः । श्री अनिवृत्तात्मने नमः । श्री दुर्जयाय नमः । श्री दुरतिक्रमाय नमः । श्री दुर्लभाय नमः । श्री दुर्गमाय नमः । श्री दुर्गाय नमः । ७८० ॥ श्री दुरावासाय नमः । श्री दुरारिघ्ने नमः । श्री शुभाङ्गाय नमः । श्री लोकसारङ्गाय नमः । श्री सुतन्तवे नमः । श्री तन्तुवर्धनाय नमः । श्री इन्द्रकर्मणे नमः । श्री महाकर्मणे नमः । श्री कृतकर्मणे नमः । श्री कृतागमाय नमः । ७९० ॥ श्री उद्भवाय नमः । श्री सुन्दराय नमः । श्री सुन्दाय नमः । श्री रत्ननाभाय नमः । श्री सुलोचनाय नमः । श्री अर्काय नमः । श्री वाजसनाय नमः । श्री शृङ्गिने नमः । श्री जयन्ताय नमः । श्री सर्वविज्जयिने नमः । ८०० ॥
श्री सुवर्ण बिन्दवे नमः श्री अक्षोभ्याय नमः । श्री सर्ववागीश्वरेश्वराय नमः । श्री महाह्रदाय नमः । श्री महागर्ताय नमः । श्री महाभूताय नमः । श्री महानिधये नमः । श्री कुमुदाय नमः । श्री कुन्दराय नमः । श्री कुन्दाय नमः । ८१० ॥ श्री पर्जन्याय नमः । श्री पावनाय नमः । श्री अनिलाय नमः । श्री अमृतांशाय नमः । श्री अमृतवपुषे नमः । श्री सर्वज्ञाय नमः । श्री सर्वतोमुखाय नमः । श्री सुलभाय नमः । श्री सुव्रताय नमः । श्री सिद्धाय नमः । ८२० ॥ श्री शत्रुजिते नमः । श्री शत्रुतापनाय नमः । श्री न्यग्रोधाय नमः । श्री उदुम्बराय नमः । श्री अश्वत्थाय नमः । श्री चाणूरान्ध्रनिषूदनाय नमः । श्री सहस्रार्चिषे नमः । श्री सप्तजिह्वाय नमः । श्री सप्तैधसे नमः । श्री सप्तवाहनाय नमः । ८३० ॥ श्री अमूर्तये नमः । श्री अनघाय नमः । श्री अचिन्त्याय नमः । श्री भयकृते नमः । श्री भयनाशनाय नमः । श्री अणवे नमः । श्री बृहते नमः । श्री कृशाय नमः । श्री स्थूलाय नमः । श्री गुणभृते नमः । ८४० ॥ श्री निर्गुणाय नमः । श्री महते नमः । श्री अधृताय नमः । श्री स्वधृताय नमः । श्री स्वास्थ्याय नमः । श्री प्राग्वंशाय नमः । श्री वंशवर्धनाय नमः । श्री भारभृते नमः । श्री कथिताय नमः । श्री योगिने नमः । ८५० ॥
श्री योगीशाय नमः । श्री सर्वकामदाय नमः । श्री आश्रमाय नमः । श्री श्रमणाय नमः । श्री क्षामाय नमः । श्री सुपर्णाय नमः । श्री वायुवाहनाय नमः । श्री धनुर्धराय नमः । श्री धनुर्वेदाय नमः । श्री दण्डाय नमः । ८६० ॥ श्री दमयित्रे नमः । श्री दमाय नमः । श्री अपराजिताय नमः । श्री सर्वसहाय नमः । श्री नियन्त्रे नमः । श्री नियमाय नमः । श्री यमाय नमः । श्री सत्त्ववते नमः । श्री सात्त्विकाय नमः । श्री सत्याय नमः । ८७० ॥ श्री सत्यधर्मपरायणाय नमः । श्री अभिप्रायाय नमः । श्री प्रियार्हाय नमः । श्री अर्हाय नमः । श्री प्रियकृते नमः । श्री प्रीतिवर्धनाय नमः । श्री विहायसगतये नमः । श्री ज्योतिषे नमः । श्री सुरुचये नमः । श्री हुतभुजे नमः । ८८० ॥ श्री विभवे नमः । श्री रवये नमः । श्री विरोचनाय नमः । श्री सूर्याय नमः । श्री सवित्रे नमः । श्री रविलोचनाय नमः । श्री अनन्ताय नमः । श्री हुतभुजे नमः । श्री भोक्त्रे नमः । श्री सुखदाय नमः । ८९० ॥ श्री नैकजाय नमः । श्री अग्रजाय नमः । श्री अनिर्विण्णाय नमः । श्री सदामर्षिणे नमः । श्री लोकाधिष्ठानाय नमः । श्री अद्भुताय नमः । श्री सनातनाय नमः । श्री सनातनतमाय नमः । श्री कपिलाय नमः । श्री कपये नमः । ९०० ॥
श्री अव्ययाय नमः । श्री स्वस्तिदाय नमः । श्री स्वस्तिकृते नमः । श्री स्वस्तये नमः । श्री स्वस्तिभुजे नमः । श्री स्वस्तिदक्षिणाय नमः । श्री अरौद्राय नमः । श्री कुण्डलिने नमः । श्री चक्रिणे नमः । श्री विक्रमिणे नमः । ९१० ॥ श्री उर्जितशासनाय नमः । श्री शब्दातिगाय नमः । श्री शब्दसहाय नमः । श्री शिशिराय नमः । श्री शर्वरीकराय नमः । श्री अक्रूराय नमः । श्री पेशलाय नमः । श्री दक्षाय नमः । श्री दक्षिणाय नमः । श्री क्षमिणां वराय नमः । ९२० ॥ श्री विद्वत्तमाय नमः । श्री वीतभयाय नमः । श्री पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः । श्री उत्तारणाय नमः । श्री दुष्कृतिघ्ने नमः । श्री पुण्याय नमः । श्री दुस्वप्ननाशाय नमः । श्री वीरघ्ने नमः । श्री रक्षणाय नमः । श्री सद्भ्यो नमः । ९३० ॥ श्री जीवनाय नमः । श्री पर्यवस्थिताय नमः । श्री अनन्तरूपाय नमः । श्री अनन्तश्रिये नमः । श्री जितमन्यवे नमः । श्री भयापहाय नमः । श्री चतुरश्राय नमः । श्री गभीरात्मने नमः । श्री विदिशाय नमः । श्री व्याधिशाय नमः । ९४० ॥ श्री दिशाय नमः । श्री अनादये नमः । श्री भूर्भुवाय नमः । श्री लक्ष्मै नमः । श्री सुवीराय नमः । श्री रुचिराङ्गदाय नमः । श्री जननाय नमः । श्री जनजन्मादये नमः । श्री भीमाय नमः । श्री भीमपराक्रमाय नमः । ९५० ॥
श्री आधारनिलयाय नमः । श्री धात्रे नमः । श्री पुष्पहासाय नमः । श्री प्रजागराय नमः । श्री उर्ध्वगाय नमः । श्री सत्पथाचाराय नमः । श्री प्राणदाय नमः । श्री प्रणवाय नमः । श्री पणाय नमः । श्री प्रमाणाय नमः । ९६० ॥ श्री प्राणनिलयाय नमः । श्री प्राणभृते नमः । श्री प्राणजीवनाय नमः । श्री तत्त्वाय नमः । श्री तत्त्वविदे नमः । श्री एकात्मने नमः । श्री जन्ममृत्युजरातिगाय नमः । श्री भुर्भुवः स्वस्तरवे नमः श्री ताराय नमः । श्री सवित्रे नमः । ९७० ॥ श्री प्रपितामहाय नमः । श्री यज्ञाय नमः । श्री यज्ञपतये नमः । श्री यज्वने नमः । श्री यज्ञाङ्गाय नमः । श्री यज्ञवाहनाय नमः । श्री यज्ञभृते नमः । श्री यज्ञकृते नमः । श्री यज्ञिने नमः । श्री यज्ञभुजे नमः । ९८० ॥ श्री यज्ञसाधनाय नमः । श्री यज्ञान्तकृते नमः । श्री यज्ञगुह्याय नमः । श्री अन्नाय नमः । श्री अन्नदाय नमः । श्री आत्मयोनये नमः । श्री स्वयञ्जाताय नमः । श्री वैखानाय नमः । श्री सामगायनाय नमः । श्री देवकीनन्दनाय नमः । ९९० ॥ श्री स्रष्ट्रे नमः । श्री क्षितीशाय नमः । श्री पापनाशनाय नमः । श्री शङ्खभृते नमः । श्री नन्दकिने नमः । श्री चक्रिणे नमः । श्री शर्ङ्गधन्वने नमः । श्री गदाधराय नमः । श्री रथाङ्गपाणये नमः । श्री अक्षोभ्याय नमः । १००० ॥
श्री सर्वप्रहरणायुधाय नमः ॥
पाठ समापन - क्षमा याचना
पढ़ने के बाद, पुनः भगवान विष्णु का ध्यान करें तथा उनसे प्रार्थना करें के पढने के समय जो भी गलती हुई हो उसके लिए आप मुझे क्षमा कीजिये और क्षमा प्रार्थना के बाद 'यह कर्म नारायण को अर्पित है!' ऐसा कह कर पूजा समाप्त कर लीजिये।
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्।
शरीर, वाणी, मन, बुद्धि और आत्मा से जो भी कर्म मैंने किया है, वह सब भगवान नारायण को समर्पित है।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि॥
भगवान विष्णु आपका कल्याण करें! 🙏
विष्णु सहस्रनामावली के अद्भुत लाभ
भगवान विष्णु के सहस्र नामों का पाठ करने की महिमा अपार और अवर्णनीय है। शास्त्रों में इसके असंख्य लाभों का वर्णन मिलता है:
- पापों का नाश: भगवान विष्णु के 1000 नामों के स्मरण मात्र से मनुष्य के अनगिनत जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह पावन स्तोत्र जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग है।
- मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धता: नियमित पाठ से मन को अद्भुत शांति प्राप्त होती है। तनाव, चिंता, और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। आत्मा को शुद्धता और पवित्रता का अनुभव होता है।
- ग्रह दोष निवारण: जब कुंडली में कोई ग्रह नीच में हो, 6-8-12वें भाव में हो, या ग्रहों से संबंधित कोई भी दोष हो तो यह पाठ अमोघ फलदायी सिद्ध होता है।
- आयु, विद्या, यश और बल में वृद्धि: नामावली का जाप करने वाले व्यक्ति की आयु बढ़ती है, विद्या प्राप्त होती है, समाज में यश फैलता है और शारीरिक तथा मानसिक बल में वृद्धि होती है।
- संपन्नता, सफलता और आरोग्य: नियमित पाठ से जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है, सभी कार्यों में सफलता मिलती है और शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।
- संतान प्राप्ति और वैवाहिक सुख: संतान उत्पत्ति में बाधा हो या दांपत्य जीवन में समस्या हो तो विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित कर नियमित पाठ करने से लाभ मिलता है।
- सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से किया गया पाठ समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है और भाग्य का उदय होता है।
- मोक्ष की प्राप्ति: अंततः यह साधना मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है और जीव को संसार के बंधनों से मुक्त करती है।
"जो भी प्राणी भगवान विष्णु के 1000 नामों का स्मरण करता है, उसे दैवीय सुख, ऐश्वर्य, संपदा और संपन्नता प्राप्त होती है।"
महाभारत, अनुशासन पर्व
पाठ के नियम और सावधानियां
यद्यपि विष्णु सहस्रनामावली के पाठ में कोई कठोर नियम-विधान नहीं है, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
| करें ✅ | न करें ❌ |
|---|---|
| प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध होकर पाठ करें | पाठ के बीच में अन्य कार्य या बातचीत न करें |
| पीले वस्त्र धारण करें (यदि संभव हो) | बृहस्पतिवार शाम को नमक का सेवन न करें |
| गुड़, चने या पीली मिठाई का भोग लगाएं | पाठ काल में तामसिक भोजन न करें |
| एकाग्रता और श्रद्धा-विश्वास बनाए रखें | जल्दबाजी में या यांत्रिक रूप से पाठ न करें |
| पुस्तक या मोबाइल को पवित्र स्थान पर रखें | अशुद्ध मन या नकारात्मक भाव से पाठ न करें |
| पाठ के बाद आरती और प्रसाद वितरण करें | क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष की भावना में पाठ न करें |
| नियमितता बनाए रखें - प्रतिदिन एक निश्चित समय पर | पाठ को बोझ न समझें - प्रेम से करें |
याद रखें!
भगवान विष्णु अत्यंत करुणामय हैं। यदि कोई नियम पूरा न हो सके तो चिंता न करें। सबसे महत्वपूर्ण है - आपकी श्रद्धा, विश्वास और समर्पण भाव। "मन चंगा तो कठौती में गंगा" - यह उक्ति यहां पूर्णतः सत्य है।
विशेष अवसर और शुभ दिन
यद्यपि विष्णु सहस्रनामावली का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, फिर भी कुछ विशेष अवसरों पर इसका पाठ अत्यधिक फलदायी माना गया है:
एकादशी तिथियां - विशेष महत्व
प्रमुख एकादशियां: देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल), देव उठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल), वैकुंठ एकादशी, पद्मिनी एकादशी, मोक्षदा एकादशी, पापमोचनी एकादशी - इन सभी एकादशियों पर पाठ करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
बृहस्पतिवार - गुरु का दिन
यदि कोई विशेष मनोकामना हो, बृहस्पति दोष हो, या संतान-विवाह संबंधी समस्या हो तो प्रत्येक बृहस्पतिवार को नियमित रूप से 11, 21 या 40 गुरुवार तक पाठ करने का संकल्प लें।
अन्य विशेष दिन और अवसर
शुभ अवसर: अनंत चतुर्दशी, दिवाली, देवोत्थान एकादशी, पुरुषोत्तम मास, खरमास (मलमास), तीर्थ यात्रा के समय, ग्रहण काल, श्राद्ध पक्ष - इन सभी विशेष अवसरों पर किया गया पाठ असाधारण फलदायी होता है।
स्तोत्र और नामावली में अंतर
| विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र | विष्णु सहस्रनामावली |
|---|---|
| 107 संस्कृत श्लोकों में बद्ध | 1000 नाम सरल सूची रूप में |
| जटिल संस्कृत उच्चारण आवश्यक | सरल हिंदी/देवनागरी में पठनीय |
| संस्कृत विद्वानों के लिए उपयुक्त | सामान्य भक्तों के लिए सुगम |
| पाठ में अधिक समय (30-40 मिनट) | तुलनात्मक रूप से कम समय (15-25 मिनट) |
| पारंपरिक और शास्त्रीय रूप | आधुनिक और सरलीकृत रूप |
| दोनों का फल समान - भगवान की कृपा और पुण्य प्राप्ति | |
दोनों में से किसी का भी पाठ करें, फल एक समान है। भगवान विष्णु केवल आपकी भक्ति और समर्पण भाव को देखते हैं। यदि आप संस्कृत में निपुण हैं तो स्तोत्र पढ़ें, अन्यथा नामावली ही पूर्णतः पर्याप्त और फलदायी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
विष्णु सहस्रनामावली और विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र में क्या अंतर है?
विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र मूल रूप में 107 संस्कृत श्लोकों में बद्ध है जिसमें 1000 नाम निहित हैं। इसका उच्चारण संस्कृत विद्वानों के लिए सरल है परंतु सामान्य भक्तों के लिए कठिन। वहीं विष्णु सहस्रनामावली उन्हीं 1000 नामों को सरल सूची रूप में प्रस्तुत करती है जिसे कोई भी आसानी से पढ़ सकता है। दोनों का पुण्य फल समान है क्योंकि भगवान आपकी भावना देखते हैं, रूप नहीं।
क्या नामावली पढ़ने से स्तोत्र के समान ही फल मिलता है?
हां, बिल्कुल! विष्णु सहस्रनामावली का पाठ करने से वही पुण्यफल प्राप्त होता है जो स्तोत्र के पाठ से मिलता है। भगवान विष्णु अत्यंत दयालु हैं और वे आपके हृदय की श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव को देखते हैं। यदि आप सच्चे मन से, पूर्ण विश्वास के साथ नामावली का पाठ करते हैं तो भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं और आपको अपनी कृपा प्रदान करते हैं।
मैं संस्कृत नहीं जानता, क्या फिर भी मैं विष्णु सहस्रनामावली पढ़ सकता हूं?
बिल्कुल! यही तो इस नामावली का मुख्य उद्देश्य है। यह विशेष रूप से उन भक्तों के लिए संकलित की गई है जो संस्कृत के जटिल श्लोकों का उच्चारण नहीं कर सकते। आप देवनागरी लिपि में लिखे नामों को सीधे पढ़ सकते हैं। प्रत्येक नाम के बाद 'नमः' बोलें। धीरे-धीरे, श्रद्धा के साथ पढ़ें। भगवान आपकी भावना को देखते हैं, उच्चारण की शुद्धता को नहीं।
विष्णु सहस्रनामावली पाठ में कितना समय लगता है?
विष्णु सहस्रनामावली का पूर्ण पाठ सामान्यतः 15 से 25 मिनट में पूर्ण हो जाता है, जो कि स्तोत्र पाठ (30-40 मिनट) से कम समय है। यदि आप धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक पढ़ते हैं तो थोड़ा अधिक समय लग सकता है। प्रारंभ में समय अधिक लगेगा परंतु नियमित अभ्यास से आप तीव्रता से पढ़ सकेंगे। महत्वपूर्ण यह है कि जल्दबाजी न करें, एकाग्रता बनाए रखें।
क्या मैं मोबाइल या कंप्यूटर से विष्णु सहस्रनामावली पढ़ सकता हूं?
हां, आधुनिक युग में मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर से पाठ करना पूर्णतः स्वीकार्य है। भगवान विष्णु को आपकी भक्ति चाहिए, माध्यम से उन्हें कोई आपत्ति नहीं। फिर भी यदि संभव हो तो मुद्रित पुस्तक का उपयोग करना अधिक शुभ माना जाता है। डिजिटल माध्यम उपयोग करते समय ध्यान रखें कि पाठ के दौरान फोन में अन्य सूचनाएं या कॉल विघ्न न डालें - फोन को साइलेंट मोड में रखें।
विष्णु सहस्रनामावली का पाठ दिन में कितनी बार करना चाहिए?
आदर्श रूप से प्रतिदिन एक बार पाठ करना सर्वोत्तम है। विशेष मनोकामना के लिए आप दिन में दो बार (प्रातः और सायं) भी पाठ कर सकते हैं। कुछ भक्त 11, 21, 40 या 108 दिनों का संकल्प लेकर नियमित पाठ करते हैं। यदि दैनिक पाठ संभव न हो तो कम से कम सप्ताह में एक बार बृहस्पतिवार को अवश्य करें। नियमितता सबसे महत्वपूर्ण है।
क्या बिना स्नान किए नामावली पाठ कर सकते हैं?
आदर्श रूप से स्नान करके शुद्ध होकर पाठ करना चाहिए। परंतु यदि किसी कारणवश (बीमारी, ठंड, समय की कमी आदि) स्नान संभव न हो तो आप हाथ-मुंह-पैर धोकर, शुद्ध मन से भगवान विष्णु का ध्यान करके पाठ कर सकते हैं। मानसिक रूप से यह भावना करें कि भगवान की दिव्य दृष्टि आपको शुद्ध कर रही है। श्रद्धा और भावना सबसे महत्वपूर्ण है, बाह्य शुद्धता से अधिक।
महिलाएं मासिक धर्म के दौरान नामावली पाठ कर सकती हैं क्या?
भगवान विष्णु सर्वव्यापी, करुणामय और सभी प्राणियों के स्वामी हैं। आधुनिक आध्यात्मिक विचारधारा के अनुसार, शुद्ध मन और श्रद्धा से किया गया पाठ किसी भी समय मान्य है। यह व्यक्तिगत विश्वास, पारिवारिक परंपरा और आपकी सहजता पर निर्भर करता है। यदि आप सहज महसूस करती हैं तो पाठ करें, अन्यथा मानसिक जाप या ध्यान कर सकती हैं। भगवान आपकी भक्ति में कभी बाधा नहीं डालते।
नामावली का पाठ करने से कौन-कौन से दोष दूर होते हैं?
विष्णु सहस्रनामावली का पाठ विशेष रूप से बृहस्पति (गुरु) ग्रह के दोष निवारण में अत्यंत प्रभावी है। इसके अतिरिक्त यह सभी ग्रह दोषों, पितृ दोष, कालसर्प दोष, और अन्य ज्योतिषीय समस्याओं में लाभकारी है क्योंकि भगवान विष्णु समस्त ग्रहों और नवग्रहों के नियंत्रक हैं। नियमित पाठ से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
क्या विष्णु सहस्रनामावली सुनने से भी लाभ मिलता है?
हां, बिल्कुल! यदि आप किसी कारणवश स्वयं पाठ नहीं कर सकते (व्यस्तता, यात्रा, बीमारी आदि) तो विष्णु सहस्रनामावली का ऑडियो सुनना भी अत्यंत लाभकारी है। ध्यानपूर्वक, श्रद्धा के साथ सुनें। कई भक्त प्रातःकाल या सोते समय इसका ऑडियो सुनते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान के नाम का श्रवण भी पाप नाशक और पुण्यदायी है। परंतु स्वयं पाठ करना अधिक श्रेयस्कर है।
यहाँ पर दी हुई श्री विष्णु सहस्रनामावली सामान्य जन मानस की भक्ति भावना को ध्यान में रखते हुए दी गयी गई है और पूर्ण प्रयत्न रहा है के यह प्रक्रिया त्रुटिहीन रहे, परंतु मानव स्वभाव को ध्यान रखते हुए, त्रुटियाँ अपेक्षित हैं। परंतु श्रद्धा ही प्रधान है! किसी भी संदेह की स्थिति में किसी योग्य पंडित या गुरुजन से परामर्श अवश्य लें।
संदर्भ स्रोत:
महाभारत - अनुशासन पर्व (भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदेश)
वैदिक ज्योतिष शास्त्र
श्री विष्णु पुराण
पद्म पुराण
गरुड़ पुराण
- Ultimate remedy of every problem of life (Disease, health, luck) : Shri Vishnu Sahasranam-The फलश्रुति (Phala Shruti) section
- श्री विष्णुअष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम्: 108 नामों का वो 'कोस्मिक पासवर्ड' जो आपकी किस्मत का लॉक खोल सकता है! (Lyrics & Meaning Inside)
- कुंडली के दोष मिटाने वाला महाउपाय - अगर ये पढ़ लिया तो कालसर्प, पितृ और मांगलिक दोष से मुक्ति