चेतावनी: अगर आप अपनी लाइफ में "स्टक" (Stuck) महसूस कर रहे हैं, मानसिक शांति (Mental Peace) की तलाश में हैं, या बस अपनी "किस्मत" (Luck) को एक नया सॉफ्टवेयर अपडेट देना चाहते हैं, तो यह पेज आपके लिए इंटरनेट का सबसे कीमती कोना है।
हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ हमारा दिमाग 24 घंटे भाग रहा है। चिंता, स्ट्रेस, और फ्यूचर का डर...
क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे हम इस शोर को बंद करके 'ब्रह्मांडीय शांति' (Cosmic Peace) से जुड़ सकें?
जी हाँ, है।
इसका नाम है - श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् (Sri Vishnu Ashtottara Shatanam Stotram)।
यह केवल संस्कृत के शब्द नहीं हैं। यह "साउंड थेरेपी" (Sound Therapy) है। जब आप भगवान विष्णु के इन 108 नामों का उच्चारण करते हैं, तो आपके शरीर का एक-एक सेल (Cell) री-एनर्जाइज होने लगता है।
आज इस आर्टिकल में हम आपको देंगे:
- सम्पूर्ण लिरिक्स (Lyrics in Sanskrit & Hindi)
- हर श्लोक का सरल हिंदी अर्थ (Meaning)
- वैज्ञानिक लाभ (Scientific Benefits)
- पाठ करने की सही विधि (Step-by-Step Vidhi)
1. पाठ विधि: 5 मिनट का 'स्पिरिचुअल डिटॉक्स' (The Ritual)
बहुत से लोग पूछते हैं - "सर, क्या इसके लिए मुझे बहुत बड़े अनुष्ठान की जरूरत है?"
बिल्कुल नहीं। भगवान 'भाव' के भूखे हैं, 'दिखावे' के नहीं।
सरल स्टेप्स (Simple Steps):
- शुद्धि (Cleansing): स्नान करके या हाथ-मुंह धोकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- संकल्प (Intention): हाथ में जल लें और मन में बोलें - "हे प्रभु, मैं (अपना नाम) अपनी मानसिक शांति और उन्नति के लिए आपके 108 नामों का पाठ कर रहा हूँ।" जल छोड़ दें।
- ध्यान (Visualization): भगवान विष्णु के 'चतुर्भुज रूप' (शंख, चक्र, गदा, पद्म धारी) को अपने दिल में इमेजिन करें।
- उच्चारण (Chanting): नीचे दिए गए स्तोत्र को मध्यम आवाज में पढ़ें। शब्दों की वाइब्रेशन को महसूस करें।
2. श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् (Lyrics with Meaning)
यहाँ पूरा स्तोत्र संस्कृत और उसके हिंदी अर्थ (Hindi Anuvad) के साथ दिया गया है ताकि आप सिर्फ रटें नहीं, बल्कि समझें कि आप क्या बोल रहे हैं।
श्लोक 1: वो जो सब कुछ हैं
वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम् ।
जनार्दनं हरिं कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम् ॥ 1 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- वासुदेवं: जो सब जगह बसते हैं।
- हृषीकेशं: जो हमारी इन्द्रियों (Senses) के स्वामी हैं।
- वामनं: जो वामन रूप धारी हैं।
- जलशायिनम्: जो जल (क्षीरसागर) में शयन करते हैं।
- जनार्दनं: जो दुष्टों का नाश और भक्तों की पीड़ा दूर करते हैं।
- गरुडध्वजम्: जिनके ध्वज पर गरुड़ विराजमान हैं।
श्लोक 2: अनंत और शाश्वत
वाराहं पुंडरीकाक्षं नृसिंहं नरकांतकम् ।
अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनंतमजमव्ययम् ॥ 2 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- वाराहं: पृथ्वी को बचाने वाले वराह रूप।
- पुंडरीकाक्षं: कमल जैसे नेत्रों वाले।
- नृसिंहं: नरसिंह रूप धारी (भक्त प्रह्लाद के रक्षक)।
- नरकांतकम्: नरकासुर का अंत करने वाले।
- अव्यक्तं शाश्वतं: जो दिखाई नहीं देते पर हमेशा (Eternal) हैं।
श्लोक 3: पृथ्वी को धारण करने वाले
नारायणं गदाध्यक्षं गोविंदं कीर्तिभाजनम् ।
गोवर्धनोद्धरं देवं भूधरं भुवनेश्वरम् ॥ 3 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- नारायणं: मनुष्यों के परम आश्रय।
- गोविंदं: गायों और वेदों के रक्षक।
- कीर्तिभाजनम्: यश के पात्र।
- गोवर्धनोद्धरं: गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले।
- भुवनेश्वरम्: पूरे ब्रह्मांड (भुवन) के ईश्वर।
श्लोक 4: यज्ञ स्वरूप
वेत्तारं यज्ञपुरुषं यज्ञेशं यज्ञवाहनम् ।
चक्रपाणिं गदापाणिं शंखपाणिं नरोत्तमम् ॥ 4 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- वेत्तारं: सब कुछ जानने वाले।
- यज्ञपुरुषं: यज्ञ के भोक्ता।
- चक्र/गदा/शंखपाणिं: जिनके हाथों में चक्र, गदा और शंख सुशोभित है।
- नरोत्तमम्: नरों (मनुष्यों) में उत्तम।
श्लोक 5: तीनों लोकों के स्वामी
वैकुंठं दुष्टदमनं भूगर्भं पीतवाससम् ।
त्रिविक्रमं त्रिकालज्ञं त्रिमूर्तिं नंदकेश्वरम् ॥ 5 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- वैकुंठं: जहाँ कोई कुंठा (दुःख) नहीं है।
- पीतवाससम्: पीले वस्त्र पहनने वाले।
- त्रिविक्रमं: तीन डगों में ब्रह्मांड नापने वाले।
- त्रिकालज्ञं: भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने वाले।
श्लोक 6: मंगलकारी रूप
रामं रामं हयग्रीवं भीमं रौद्रं भवोद्भवम् ।
श्रीपतिं श्रीधरं श्रीशं मंगलं मंगलायुधम् ॥ 6 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- रामं: जो योगियों को आनंद देते हैं (परशुराम और श्रीराम)।
- हयग्रीवं: घोड़े के मुख वाले (ज्ञान के देवता)।
- श्रीपतिं/श्रीधरं: लक्ष्मी के स्वामी और लक्ष्मी को धारण करने वाले (Wealth Givers)।
- मंगलं: जो स्वयं मंगल स्वरूप हैं।
श्लोक 7: आनंद के सागर
दामोदरं दमोपेतं केशवं केशिसूदनम् ।
वरेण्यं वरदं विष्णुमानंदं वासुदेवजम् ॥ 7 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- दामोदरं: जिनके उदर (पेट) पर रस्सी के निशान हैं (भक्ति से बंधे हुए)।
- केशवं: जिनके बाल सुंदर हैं (या ब्रह्मा, विष्णु, शिव के स्वामी)।
- वरदं: वरदान देने वाले।
- आनंदं: जो साक्षात आनंद (Bliss) हैं।
श्लोक 8: निर्गुण और सगुण
हिरण्यरेतसं दीप्तं पुराणं पुरुषोत्तमम् ।
सकलं निष्कलं शुद्धं निर्गुणं गुणशाश्वतम् ॥ 8 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- पुराणं: जो सबसे प्राचीन हैं।
- सकलं/निष्कलं: जो कलाओं से युक्त भी हैं और कलाओं से परे भी।
- निर्गुणं: जो प्रकृति के गुणों (सत, रज, तम) से बंधे नहीं हैं।
श्लोक 9: सूर्य के समान तेज
हिरण्यतनुसंकाशं सूर्यायुतसमप्रभम् ।
मेघश्यामं चतुर्बाहुं कुशलं कमलेक्षणम् ॥ 9 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- सूर्यायुतसमप्रभम्: दस हजार सूर्यों के समान तेजस्वी।
- मेघश्यामं: बादलों जैसे श्याम वर्ण वाले।
- चतुर्बाहुं: चार भुजाओं वाले।
श्लोक 10: सबका स्वरूप
ज्योतीरूपमरूपं च स्वरूपं रूपसंस्थितम् ।
सर्वज्ञं सर्वरूपस्थं सर्वेशं सर्वतोमुखम् ॥ 10 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- ज्योतीरूपं: जो प्रकाश स्वरूप हैं।
- सर्वज्ञं: सब कुछ जानने वाले।
- सर्वतोमुखम्: जिनके मुख हर दिशा में हैं (Omnipresent)।
श्लोक 11: ज्ञान के दाता
ज्ञानं कूटस्थमचलं ज्ञानदं परमं प्रभुम् ।
योगीशं योगनिष्णातं योगिसंयोगरूपिणम् ॥ 11 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
- कूटस्थमचलं: जो कभी बदलते नहीं, स्थिर हैं।
- ज्ञानदं: ज्ञान देने वाले।
- योगीशं: योगियों के ईश (भगवान)।
श्लोक 12: समापन
ईश्वरं सर्वभूतानां वंदे भूतमयं प्रभुम् ।
इति नामशतं दिव्यं वैष्णवं खलु पापहम् ॥ 12 ॥
हिंदी अर्थ (Meaning):
जो सभी प्राणियों के ईश्वर हैं, उन प्रभु को मैं वंदना करता हूँ। यह 100 दिव्य नामों का स्तोत्र निश्चित रूप से पापों का नाश करने वाला है।
3. फलश्रुति: इसका पाठ करने से क्या मिलेगा? (Benefits of Chanting)
व्यास जी ने स्वयं इसकी गारंटी ली है। ये कोई मार्केटिंग नहीं, 'कॉस्मिक लॉ' (Cosmic Law) है।
सर्वपापविशुद्धात्मा विष्णुसायुज्यमाप्नुयात् ।
चांद्रायणसहस्राणि कन्यादानशतानि च ॥
गवां लक्षसहस्राणि मुक्तिभागी भवेन्नरः ।
अश्वमेधायुतं पुण्यं फलं प्राप्नोति मानवः ॥
आसान भाषा में लाभ:
- पापों का नाश (Detox): यह स्तोत्र आपके पुराने कर्मों (Bad Karma) को जलाकर राख कर देता है।
- विष्णु लोक की प्राप्ति: अंत समय में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
- महापुण्य: इसका फल हजारों 'चांद्रायण व्रत', सैकड़ों 'कन्यादान' और लाखों 'गौदान' के बराबर बताया गया है।
- मानसिक शांति: डिप्रेशन और एंग्जायटी का सबसे सस्ता और टिकाऊ इलाज।
- यश और वैभव: जो नियमित पाठ करता है, लक्ष्मी (Wealth) उसके घर का रास्ता कभी नहीं भूलती।
4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न: क्या मैं बिना नहाए इसका पाठ कर सकता हूँ?
उत्तर: आपातकाल में या बीमारी में मानसिक जप (Mental Chanting) कर सकते हैं। लेकिन शारीरिक शुद्धि से 'वाइब्रेशन' अच्छी बनती है।
प्रश्न: क्या इसका हिंदी अनुवाद पढ़ सकते हैं या संस्कृत जरुरी है?
उत्तर: संस्कृत के शब्दों में एक विशेष 'ध्वनि विज्ञान' (Science of Sound) है। कोशिश करें संस्कृत पढ़ें (भले ही धीरे पढ़ें), लेकिन भाव समझने के लिए हिंदी अर्थ जानना जरुरी है।
प्रश्न: विष्णु सहस्रनाम और अष्टोत्तर में क्या अंतर है?
उत्तर: सहस्रनाम में 1000 नाम हैं (समय: 20-30 मिनट)। अष्टोत्तर में 108 नाम हैं (समय: 5 मिनट)। व्यस्त लोगों के लिए अष्टोत्तर एक वरदान है।
निष्कर्ष: 5 मिनट का निवेश, अनंत रिटर्न
दोस्त, हम नेटफ्लिक्स और रील्स पर घंटों बर्बाद कर देते हैं।
क्या हम अपनी आत्मा (Soul) के लिए 5 मिनट नहीं निकाल सकते?
यह स्तोत्र आपके जीवन का 'एंटीवायरस' है। इसे रोज सुबह अपने 'सिस्टम' में रन कीजिये।
यकीन मानिए, जब आप 'नारायण' के साथ सिंक (Sync) हो जाते हैं, तो दुनिया की कोई भी परेशानी आपको हिला नहीं सकती।
आज से ही शुरू कीजिये।
So basically...
Tune into the frequency of Vishnu. The signal is always strong.
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And As Always
Thanks For Reading!!!
~ PSMishra